मंगलवार 20 अक्टूबर 2026 - 15:38
इमाम ज़माना (अ) से तजदीद-ए-अहद के लिए हरम-ए-हज़रत मासूमा (स) में हौज़ा इल्मिया की 600 नवप्रवेशी छात्राओं की उपस्थिति

ईरान के पवित्र नगर क़ुम में हौज़ा इल्मिया ख़्वाहर (महिला धार्मिक शिक्षण संस्थान) के नए शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश लेने वाली 600 छात्राओं ने हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स) के पवित्र हरम में आयोजित एक समारोह में इमाम ज़माना (अज्जल्लाहु तआला फ़रजहुश्शरीफ़) से अपने अहद का नवीनीकरण किया और धार्मिक शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह समारोह पवित्र हरम के शबिस्तान-ए-हज़रत ज़हरा (स) में आयोजित किया गया, जिसमें हौज़ा इल्मिया में नए शैक्षणिक वर्ष के लिए प्रवेश लेने वाली छात्राओं ने भाग लिया।

हौज़ा इल्मिया ख़्वाहरान, क़ुम की प्रमुख ज़हरा सादात मोमेनी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि धार्मिक ज्ञान से सुसज्जित और जागरूक महिलाओं का प्रशिक्षण इस्लामी व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए धार्मिक ज्ञान प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, क्योंकि वे परिवार और समाज में धार्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में बुनियादी भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक शिक्षाओं से परिचित महिलाएं नई पीढ़ी के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से इस्लामी मूल्यों को आम कर सकती हैं। उनके अनुसार, हौज़ा इल्मिया में शिक्षा प्राप्त करने वाली महिलाएं इस्लामी क्रांति के विचारों को दुनिया भर में परिचित कराने और इस्लाम की वास्तविक शिक्षाओं को प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने महिलाओं को तब्लीग़-ए-दीन और जेहाद-ए-तबयीन (सत्य एवं वास्तविकताओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने के अभियान) तथा प्रतिरोध के क्षेत्र में भी अग्रणी बताया।

हौज़ा इल्मिया के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली असग़र क़ाएमी ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं धार्मिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इस्लामी ज्ञान और शिक्षाओं से परिचित होना समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा पारिवारिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का माध्यम बन सकता है।

उन्होंने हौज़ा इल्मिया की शिक्षा को इमाम ज़माना (अज्जल्लाहु तआला फ़रजहुश्शरीफ़) की सेवा बताते हुए छात्राओं से आग्रह किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर आत्मनिर्माण तथा शैक्षणिक एवं नैतिक विकास पर ध्यान दें और इमाम ज़माना (अ) के ज़ुहूर की राह प्रशस्त करने में अपनी भूमिका निभाएं।

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